आप में से बहुत लोगो के मन में सवाल होता होगा की जिस इंटरनेट को हम हमेशा यूज़ करते है उसका मालिक कौन है। जब आप किसी कंपनी आईडिया एयरटेल या और दूसरी कंपनी का डेटा पैक कराते है। तो आपके अंदर ये सवाल होगा की ये कंपनी नेट के लिए किसे पइसे देती होगी। इसे समझने के लिए हमे सबसे पहले जानना होगा की इंटरनेट काम कैसा करता है ? और फिर जानेंगे इंटरनेट का मालिक कौन है ?

मान लीजिये आप इस वेबसाइट से आर्टिकल पढ़ रहे है। तो इस आर्टिकल को आप हजारो किलोमीटर दूर रखे वेबसाइट के सर्वर से प्राप्त कर रहे है। जब वेबसाइट के सर्वर से आपके मोबाइल में या कम्प्यूटर में आर्टिकल आ रहा है। तो उस सर्वर और आपके मोबाइल या कम्प्यूटर के बीच एक कनेक्शन बन रहा है। और इसी कनेक्शन के लिए आपको रुपये देने होते है। ये रुपये आप नेशनल लेवल कंपनी जैसे आईडिया , एयरटेल , वोडाफोन या लोकल इंटरनेट प्रोवाइडर को देते है। लेकिन ये नेशनल कंपनी की पहुंच सिर्फ अपने देश तक होती है। इसलिए ये कंपनियां इंटरनेट के लिए इंटरनेशनल कंपनी को पैसा देती है। इसे आप आसानी से समझने के लिए इसे तीन भागो में बाँट ले।

पहला ये वह कंपनी होती है (sprint usa slovakia PLDT center net ) जिन्होंने समुद्र में optical fibers cable बिछाकर एक दुसरे देश को केबल के जरिये कनेक्ट किया है। इन कंपनियों ने अपने खुद के पैसे या अलग-अलग इन्वेस्टमेंट से केबल को समुद्र में बिछाया है। इन केबल के जरिये ही हम इन्टरनेट चला पाते है। ये कंपनियां नेशनल लेवल कि कंपनियों से पैसा लेती है।

दूसरा : ये नेशनल लेवल कि कंपनिया होती है l जैसे airtel idea reliance जो हमें या लोकल इंटरनेट प्रोवाइडर (wifi ) को इंटरनेट उपलब्ध कराती है।

तीसरा : ये local internet provider (wifi ) कंपनियां होती है जैसे hathway spectra net जिन्हें  हम महीने के हिसाब से payment करके इन्टरनेट use करते है l ये कंपनियां नेशनल लेवल कि कंपनियों (एयरटेल आईडिया वोडाफोन ) को पैसा देती है।

जब हम इंटरनेट के डेटा पैक के लिए किसी कंपनी को पैसे देते है। तो वो पैसा नेशनल लेवल कंपनी के पास जाता है। उसके बाद इंटरनेशनल लेवल कंपनी को जाता है। लेकिन इंटरनेशनल कंपनी वो पैसा किसी को नहीं देती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here